प्रतापगढ़. जिले के आदिवासी अंचल धरियावद उपखंड की वगतपुरा ग्राम पंचायत स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में शिक्षकों की भारी कमी सामने आई है। विद्यालय में वर्तमान में कक्षा 9 से 12 तक कुल 235 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, जबकि पढ़ाने के लिए मात्र 4 अध्यापक ही उपलब्ध हैं। इस गंभीर स्थिति को लेकर ग्रामीणों, विद्यार्थियों और अभिभावकों में गहरा रोष है।
इसी को लेकर ग्रामीणजन विद्यालय पहुंचे और व्यवस्थाओं का जायजा लिया। कक्षा 11वीं की छात्रा सुनीता मीणा ने बताया कि शिक्षकों की कमी के कारण पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। कई विषयों की नियमित कक्षाएं नहीं लग पा रही हैं, जिससे बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी को लेकर विद्यार्थियों में चिंता बनी हुई है। उन्होंने कहा कि भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति है।
स्थानीय ग्रामीण जितेंद्र मीणा ने बताया कि वर्ष 2021 में विद्यालय को उच्च माध्यमिक स्तर में क्रमोन्नत किया गया था, लेकिन आज तक एक भी व्याख्याता की स्थायी नियुक्ति नहीं हुई है। सभी व्याख्याता पद रिक्त पड़े हैं। कई बार डेपुटेशन पर शिक्षक लगाए जाते हैं, लेकिन वे कुछ समय बाद स्थानांतरित हो जाते हैं। परिणामस्वरूप चार अध्यापक ही पूरे विद्यालय का शैक्षणिक भार संभाल रहे हैं।विद्यालय में कक्षाओं की भी भारी कमी है। पर्याप्त कमरे नहीं होने के कारण कई बार विद्यार्थियों को बाहर बैठाकर पढ़ाई करवाई जाती है, जो आदिवासी अंचल जैसे क्षेत्र में शिक्षा की बदहाल स्थिति को दर्शाता है। ग्रामीणों का कहना है कि जिले के कई आदिवासी क्षेत्रों के स्कूलों में यही हाल है।ग्रामीणों ने कई बार जनप्रतिनिधियों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। एक ओर सरकार “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” का नारा दे रही है, वहीं दूसरी ओर आदिवासी परिवारों की बेटियां आज शिक्षकों की मांग को लेकर संघर्ष कर रही हैं। यदि समय रहते शिक्षकों की नियुक्ति और आधारभूत सुविधाएं नहीं बढ़ाई गईं, तो क्षेत्र के बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो सकता है।
