नाला बना सत्ता की नाक! अचानक बदले रास्ते पर मंत्री खर्रा, अफसरों में मची खलबली

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प्रतापगढ़ का नाला अब सिर्फ पानी का रास्ता नहीं, बल्कि सत्ता, सिस्टम और सियासत की परीक्षा बन गया है। अचानक बदले रास्ते से मंत्री झाबर सिंह खर्रा की एंट्री ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। सवाल यही है—अब फैसला किसके पक्ष में होगा? गौरतलब है कि प्रतापगढ़ में लंबे समय से चला आ रहा नाला विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने इस मामले में बड़ा हस्तक्षेप करते हुए बांसवाड़ा से चित्तौड़गढ़ जाते समय अपना तय कार्यक्रम बदलकर प्रतापगढ़ पहुंचकर मौके पर निरीक्षण किया। मंत्री का यह दौरा न केवल प्रशासनिक बल्कि राजनीतिक रूप से भी बेहद अहम माना जा रहा है।

मंत्री खर्रा ने नाले की वास्तविक स्थिति का मौके पर जायजा लिया और पूरे विवाद से जुड़े दस्तावेज, पत्राचार और फाइलें तलब कर उनका गहन अध्ययन किया। निरीक्षण के दौरान नगर परिषद सभापति, विधायक प्रतिनिधि और उदयपुर सांसद मन्नालाल रावत के बीच हुए पत्राचार की जानकारी भी मंत्री को दी गई।

मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जनहित से जुड़े मामलों में अनावश्यक देरी किसी भी हाल में स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि नाले विवाद को लेकर दो दिनों के भीतर ठोस निर्णय लिया जाएगा और स्थाई समाधान की दिशा में कार्रवाई होगी। मंत्री ने कहा कि जो भी निर्णय लिया जाएगा, वह पूरी तरह जनता के हित को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।

स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने मंत्री के सामने कलेक्टर के कथित एरियल रवैये और प्रशासनिक टकराव को लेकर शिकायतें रखीं। इस पर मंत्री खर्रा ने दो टूक कहा कि नौकरशाही को जनता और जनप्रतिनिधियों पर हावी नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने साफ कहा कि यदि किसी स्तर पर गलती पाई जाती है, तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई तय है।

मंत्री ने यह भी बताया कि उदयपुर और बांसवाड़ा दौरे के दौरान उन्हें प्रतापगढ़ की स्थिति की गंभीर जानकारी मिली थी। इसी कारण उन्होंने स्वयं मौके पर पहुंचकर जमीनी हकीकत समझना जरूरी समझा। उन्होंने कहा कि सरकार केवल कागजों के आधार पर नहीं, बल्कि मौके की वास्तविक परिस्थितियों को देखकर निर्णय लेगी।

गौरतलब है कि प्रतापगढ़ में नाले को लेकर कलेक्टर और नगर परिषद सभापति के बीच चल रहा टकराव अब सीधे राज्य सरकार के संज्ञान में आ चुका है। मंत्री खर्रा के इस औचक निरीक्षण और सख्त रुख के बाद साफ संकेत मिल रहे हैं कि सरकार अब एक्शन मोड में है और नाले विवाद का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। अब सबकी नजरें अगले दो दिनों पर टिकी हैं, जब इस लंबे विवाद पर अंतिम फैसला आने की संभावना जताई जा रही है।

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