नीलगाय का आतंक बढ़ा, किसान और वाहन चालक परेशान
प्रतापगढ़। जिले में नीलगाय का आतंक लगातार गंभीर होता जा रहा है। खेतों में घुसकर नीलगायें किसानों की खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रही हैं। इससे किसानों की मेहनत और लागत दोनों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। वहीं दूसरी ओर, सड़कों पर नीलगायों की बढ़ती आवाजाही आम लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रही है।
खेतों में नीलगाय का आतंक, रबी फसलें तबाह
ग्रामीण इलाकों में नीलगाय का आतंक सबसे अधिक देखने को मिल रहा है। किसान बताते हैं कि रात के समय नीलगायें झुंड में खेतों में घुस जाती हैं। गेहूं, चना, सरसों और जौ जैसी रबी फसलों को भारी नुकसान पहुंच रहा है।
हालांकि किसान तारबंदी, पहरेदारी और रोशनी की व्यवस्था कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद समस्या कम नहीं हो रही है। परिणामस्वरूप किसान मानसिक और आर्थिक दबाव में आ गए हैं।
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सड़कों पर नीलगाय का आतंक, हादसों की आशंका
खेतों के साथ-साथ नीलगाय का आतंक अब सड़कों तक पहुंच गया है। विशेषकर मंदसौर–प्रतापगढ़ मुख्य मार्ग पर अचानक नीलगायों के सड़क पार करने से दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।
कई बार दोपहिया और चारपहिया वाहन नीलगाय से टकरा चुके हैं। कुछ मामलों में वाहन चालकों को गंभीर चोटें भी आई हैं। रात के समय यह खतरा और अधिक बढ़ जाता है, क्योंकि नीलगायें अंधेरे में दिखाई नहीं देतीं।

प्रशासन से समाधान की मांग तेज
स्थानीय ग्रामीणों और किसानों ने प्रशासन एवं वन विभाग से नीलगाय के आतंक से निजात दिलाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि सड़क किनारे चेतावनी संकेतक, रिफ्लेक्टर बोर्ड और स्पीड ब्रेकर लगाए जाएं।
इसके साथ ही नीलगायों को सुरक्षित वन क्षेत्रों में स्थानांतरित करने की ठोस योजना बनाई जाए, ताकि फसलें भी बचें और सड़क हादसों पर भी लगाम लगे।
👉 वन्यजीव संरक्षण संबंधी दिशा-निर्देशों के लिए राज्य वन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट देखें।
नीलगाय का आतंक बना बड़ी चुनौती
यदि समय रहते नीलगाय का आतंक नियंत्रित नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं। किसानों की फसलें बर्बाद होंगी और सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में इजाफा होगा। ऐसे में प्रशासनिक हस्तक्षेप अब बेहद जरूरी हो गया है।
