प्रतापगढ़ कृषि उपज मंडी में प्याज की आवक घटने से दामों में हल्की तेजी आई है। जानिए आज के प्याज और लहसुन के ताजा भाव।
प्रतापगढ़ मंडी में प्याज के भाव में सुधार, घटती आवक से किसानों को मिली राहत
प्रतापगढ़. जिले की कृषि उपज मंडी से किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। बीते कुछ दिनों पहले जहां प्याज की बंपर आवक के कारण दामों में भारी गिरावट दर्ज की गई थी, वहीं अब हालात में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिल रहा है।
हालांकि पिछले सप्ताह मंडी में प्याज की अधिक आवक से कीमतें बेहद निचले स्तर पर पहुंच गई थीं। इस कारण किसानों को अपनी फसल की लागत निकालना भी मुश्किल हो गया था। कई किसानों को मजबूरी में कम दामों पर अपनी उपज बेचनी पड़ी।
प्याज की आवक में आई कमी
इसी दौरान, पिछले दो दिनों से प्रतापगढ़ कृषि उपज मंडी में प्याज की आवक में कमी दर्ज की गई है। इसके चलते प्याज के दामों में हल्की बढ़ोतरी देखने को मिली है।
व्यापारियों के अनुसार, बाहर से आने वाली प्याज की आवक घटने और स्थानीय मांग बढ़ने से यह सुधार संभव हो सका है। इससे किसानों को कुछ हद तक राहत मिली है और बाजार में सकारात्मक संकेत नजर आ रहे हैं।
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प्याज के ताजा भाव क्या रहे
वर्तमान समय में प्रतापगढ़ मंडी में प्याज की कीमतें 500 रुपये से 2000 रुपये प्रति क्विंटल तक दर्ज की जा रही हैं।
वहीं, अच्छी गुणवत्ता वाला प्याज ऊंचे दामों पर बिक रहा है। इसके विपरीत, सामान्य गुणवत्ता के प्याज के भाव अभी भी निचले स्तर पर बने हुए हैं।
हालांकि किसान उम्मीद कर रहे हैं कि आने वाले दिनों में गुणवत्ता वाले माल की मांग बढ़ेगी। इससे उन्हें बेहतर कीमत मिल सकती है।
व्यापारियों की राय और बाजार का रुख
वहीं व्यापारियों का कहना है कि यदि प्याज की आवक इसी तरह नियंत्रित रही, तो दामों में और सुधार देखने को मिल सकता है।
इसके बाद, बाजार में मांग बढ़ने की स्थिति बनी तो किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलने की संभावना है। व्यापारियों का मानना है कि अगले कुछ दिनों में बाजार की दिशा साफ हो जाएगी।
लहसुन के दाम फिलहाल स्थिर
इसके साथ ही, प्रतापगढ़ मंडी में लहसुन के दामों में फिलहाल स्थिरता बनी हुई है।
मंडी में लहसुन के भाव 4000 रुपये से लेकर 11000 रुपये प्रति क्विंटल तक चल रहे हैं। अच्छी क्वालिटी के लहसुन को बेहतर दाम मिल रहे हैं, जबकि सामान्य लहसुन के भाव स्थिर बने हुए हैं।

किसानों को बाजार सुधार की उम्मीद
हालांकि हालिया तेजी से किसानों को राहत जरूर मिली है, लेकिन वे अभी पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। किसान और व्यापारी दोनों ही आने वाले दिनों में बाजार में और सुधार की उम्मीद कर रहे हैं।
यदि मांग बढ़ी और आवक नियंत्रित रही, तो किसानों को उनकी मेहनत का सही मूल्य मिल सकता है।
