छोटीसादड़ी अस्पताल डॉक्टर नियुक्ति या लोकतंत्र पर संकट? अनशन से उठाया गया मनीष

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छोटीसादड़ी अस्पताल डॉक्टर नियुक्ति अनशन

छोटीसादड़ी अस्पताल डॉक्टर नियुक्ति को लेकर उपखण्ड क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली अब गंभीर टकराव की स्थिति में पहुंच गई है। सामाजिक कार्यकर्ता मनीष उपाध्याय पिछले चार दिनों से स्थानीय चिकित्सालय परिसर में आमरण अनशन पर बैठे थे।

उनकी मुख्य मांग थी कि छोटीसादड़ी अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की तत्काल नियुक्ति की जाए, ताकि गंभीर मरीजों को प्रतापगढ़ या उदयपुर रेफर न करना पड़े।


प्रशासन को तीन महीने तक दी गई जानकारी, फिर भी नहीं हुई सुनवाई

अनशन से पहले मनीष उपाध्याय ने करीब तीन महीनों तक ज्ञापन, पत्राचार और विभिन्न माध्यमों से प्रशासन एवं सरकार को अवगत कराया।
हालांकि, छोटीसादड़ी अस्पताल डॉक्टर नियुक्ति के मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

इसी उपेक्षा के विरोध में उन्होंने आमरण अनशन का रास्ता अपनाया।


अनशन के दौरान जनता का समर्थन, प्रशासन पर बढ़ा दबाव

अनशन स्थल पर बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, युवा वर्ग और सामाजिक संगठनों के लोग पहुंचे।
सभी ने डॉक्टर नियुक्ति नहीं होने पर रोष व्यक्त किया।

स्थिति लगातार गंभीर होती चली गई।

छोटीसादड़ी अस्पताल डॉक्टर नियुक्ति अनशन


मेडिकल रिपोर्ट ने बढ़ाई प्रशासन की चिंता

अनशन के चौथे दिन प्रस्तुत मेडिकल रिपोर्ट में गंभीर तथ्य सामने आए।
1 से 4 जनवरी के बीच नियमित स्वास्थ्य जांच में पाया गया कि—

  • रक्तचाप खतरनाक स्तर पर रहा

  • 4 जनवरी को BP 210/114 और 167/115 दर्ज

  • इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन की स्थिति

  • मानसिक व शारीरिक दुर्घटना की आशंका

चिकित्सकों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि तत्काल अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया तो स्थिति जानलेवा हो सकती है।


एसडीएम का आदेश, पुलिस और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई

मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर उपखण्ड अधिकारी एवं मजिस्ट्रेट ने 4 जनवरी को आदेश जारी किए।
पुलिस उप अधीक्षक, तहसीलदार, बीसीएमओ और थानाधिकारी को कार्रवाई के निर्देश मिले।

रविवार शाम करीब 5 बजे एसडीएम यतिंद्र पोरवाल, तहसीलदार राजकुमार सारेल, डिप्टी गजेन्द्र सिंह एवं सीआई प्रवीण टांक भारी पुलिस बल के साथ अनशन स्थल पहुंचे।https://pratapnewstoday.com/chhotisadri-sub-district-hospital-is-in-poor-condition-why-did-fast-become-the-last-resort/

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लिखित आश्वासन की मांग, नहीं मिला तो जबरन उठाया गया

अधिकारियों ने अनशन समाप्त करने की अपील की।
नतीजतन, मनीष उपाध्याय ने डॉक्टर नियुक्ति का लिखित आश्वासन मांगा।

आश्वासन नहीं मिलने पर स्वास्थ्य रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्हें जबरन एम्बुलेंस में बैठाया गया

इस दौरान मौके पर मौजूद लोगों ने विरोध दर्ज कराया।


लोकतंत्र की हत्या” का आरोप, क्षेत्र में तनाव

इसी दौरान, एम्बुलेंस में ले जाते समय मनीष उपाध्याय ने इस कार्रवाई को लोकतंत्र की हत्या बताया।
इसके बाद अनशन स्थल से टेंट हटाया गया और परिसर में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया।

इसके बाद, पूरे क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है।

इस बीच, प्रशासन की कार्यप्रणाली पर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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