प्रतापगढ़ में 50 साल बाद ऐतिहासिक क्षण, राहुल मेहता जैन दीक्षा शनिवार को
राहुल मेहता जैन दीक्षा के साथ प्रतापगढ़ शहर 24 जनवरी को संयम, तप और आत्मकल्याण की ऐतिहासिक यात्रा का साक्षी बनने जा रहा है। श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ में लगभग 50 वर्षों बाद यह पहली दीक्षा होगी, जिसने पूरे जैन समाज में आध्यात्मिक उत्साह भर दिया है।
आज निकला मुमुक्षु दीक्षार्थी का भव्य वरघोड़ा
दीक्षा से पूर्व आज प्रतापगढ़ शहर में मुमुक्षु राहुल मेहता का भव्य वरघोड़ा निकाला गया। वरघोड़े में जैन समाज के सैकड़ों श्रद्धालु, महिलाएं, युवक-युवतियां पारंपरिक परिधान में शामिल हुए। ढोल-नगाड़ों और जयघोष के बीच शहर धर्ममय वातावरण में सराबोर नजर आया।

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राहुल मेहता जैन दीक्षा: सांसारिक सुख त्याग संयम का मार्ग
उच्च शिक्षा प्राप्त करने और आधुनिक जीवनशैली को करीब से देखने के बावजूद राहुल मेहता जैन दीक्षा का निर्णय समाज के लिए प्रेरणादायक बन गया है। आत्मिक शांति, संयम और मोक्ष मार्ग की खोज ने उन्हें सांसारिक बंधनों से ऊपर उठने की प्रेरणा दी।
पारिवारिक संस्कार बने प्रेरणा
राहुल मेहता के पिता स्वर्गीय निर्मल कुमार मेहता और माता संतोष मेहता ने सदैव धार्मिक संस्कारों का वातावरण दिया। उनकी दो बहनें प्रिया मेहता (प्रिया संघवी) और हिमानी हैं। परिवार के सहयोग ने राहुल मेहता जैन दीक्षा के संकल्प को और मजबूत किया।

शिक्षा के साथ आत्मिक झुकाव
राहुल मेहता ने प्रतापगढ़ के आदर्श स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा ली।
11वीं-12वीं: सेफिया स्कूल
स्नातक: APC कॉलेज (BBA)
स्नातकोत्तर: BN कॉलेज उदयपुर (M.Com Accounting)
इसके बावजूद उनका झुकाव सदैव धर्म और आत्मकल्याण की ओर बना रहा।
गुरुओं का सानिध्य और दीक्षा का संकल्प
वर्ष 2017 में मंदसौर में आचार्य श्री की निश्रा में उपधान तप के दौरान राहुल मेहता जैन दीक्षा का भाव दृढ़ हुआ। मुंबई और इंदौर चातुर्मास में तीन से चार वर्षों तक संतों के सानिध्य में रहकर उन्होंने साधु जीवन को नजदीक से समझा।

समाज और युवाओं को संदेश
राहुल मेहता का कहना है कि आज के युवाओं को सोशल मीडिया और भौतिक आकर्षण से ऊपर उठकर धर्म से जुड़ना चाहिए। साधु-साध्वियों की सेवा और सुरक्षा समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
