7 साल से लापता पति, तीन बच्चों के साथ संघर्ष कर रही आदिवासी महिला राधा

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प्रतापगढ़ में सामने आई आदिवासी महिला की मार्मिक कहानी
Rajasthan के प्रतापगढ़ जिले से एक बेहद संवेदनशील और चिंताजनक मामला सामने आया है। यहां एक आदिवासी महिला पिछले सात वर्षों से अपने लापता पति का इंतजार कर रही है।
पति के नहीं लौटने के बाद महिला अकेले ही अपने तीन बच्चों का पालन-पोषण कर रही है।
यह मामला धरियावद उपखंड की ग्राम पंचायत अनंत का है। यहां रहने वाली आदिवासी महिला राधा मीणा के पति सात साल पहले घर से निकले थे। इसके बाद वे कभी वापस नहीं लौटे। परिजनों ने उनकी काफी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।
थाने में दर्ज कराई गुमशुदगी, फिर भी नहीं मिला पति
राधा मीणा ने पति के लापता होने के बाद स्थानीय थाने में गुमशुदगी दर्ज करवाई। पुलिस ने भी अपनी ओर से जांच की। हालांकि, सात साल बीत जाने के बाद भी पति का कोई पता नहीं चल सका।
इस घटना के बाद राधा मीणा की जिंदगी पूरी तरह बदल गई। पति के बिना परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। दो बेटियों और एक छोटे बेटे की परवरिश का संघर्ष उन्होंने अकेले ही संभाला।

परिवार

मजदूरी कर बच्चों का पेट पाल रही राधा मीणा
राधा मीणा आज भी मेहनत-मजदूरी कर अपने बच्चों का पालन-पोषण कर रही हैं। वह सरकारी स्कूलों और आसपास के क्षेत्रों में मजदूरी करती हैं। कम आय में घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना उनके लिए बेहद कठिन हो गया है। इसके बावजूद राधा मीणा अपने बच्चों को पढ़ाने और बेहतर भविष्य देने की कोशिश कर रही हैं। लेकिन आर्थिक तंगी ने उनके सपनों को सीमित कर दिया है।

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सरकारी योजनाओं से आज भी वंचित परिवार
हालांकि सरकार द्वारा महिलाओं और बेटियों के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन राधा मीणा का परिवार इन योजनाओं से वंचित है। राधा मीणा का नाम स्टेट बीपीएल सूची में दर्ज है। इसके बावजूद उन्हें योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाया।
पालनहार योजना में उनकी बेटियों का नाम आज तक नहीं जोड़ा गया। कई बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाए गए, लेकिन हर बार आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला।

दर-दर भटक रही है आदिवासी महिला
राधा मीणा ने कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मदद की गुहार लगाई। लेकिन अब तक किसी भी योजना का लाभ नहीं मिल सका। सरकारी कागजों में पात्र होने के बावजूद सहायता न मिलना प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल खड़े करता है।
वहीं, स्थानीय लोग भी इस परिवार की स्थिति को लेकर चिंता जता रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते मदद नहीं मिली, तो बच्चों का भविष्य अंधकार में चला जाएगा।

प्रशासन से मदद की मांग
यह मामला सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत को उजागर करता है। जरूरत है कि प्रशासन इस मामले का संज्ञान ले और राधा मीणा व उनके बच्चों को तुरंत योजनाओं का लाभ दिलाए।
साथ ही, लापता पति के मामले की दोबारा गंभीरता से जांच कराई जाए, ताकि महिला को न्याय मिल सके।

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