प्रतापगढ़. प्राइवेट बस हड़ताल प्रतापगढ़ में शनिवार को जिलेभर के यात्रियों के लिए बड़ी परेशानी लेकर आ रही है। निजी बस संचालकों के आह्वान पर जिले की सभी प्राइवेट बसें एक दिन के लिए सड़क से नदारद रहेंगी। इस हड़ताल ने आमजन के साथ-साथ प्रशासन की चिंता भी बढ़ा दी है, क्योंकि प्रतापगढ़ एक आदिवासी और ग्रामीण बहुल जिला है, जहां निजी बसें ही परिवहन का मुख्य साधन हैं।
क्यों हो रही है प्राइवेट बस हड़ताल प्रतापगढ़?
प्राइवेट बस एसोसिएशन के अध्यक्ष साकिर खान के निर्देशन में यह प्राइवेट बस हड़ताल प्रतापगढ़ आयोजित की जा रही है। बस संचालक मोहम्मद इसाक ने जानकारी देते हुए बताया कि यह हड़ताल 11 सूत्रीय मांगों को लेकर रखी गई है। शनिवार सुबह 11 बजे बस संचालक सचिवालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपेंगे और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करेंगे।
केरियर हटाने से बढ़ी परेशानी
प्रतापगढ़ जिले की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए यहां एक बस में औसतन 50 से 52 यात्री सफर करते हैं। यात्रियों के साथ उनका भारी लगेज भी रहता है। लेकिन हाल ही में परिवहन विभाग द्वारा बसों पर लगे केरियर (जंगले) उतरवा दिए गए।
इसके कारण प्राइवेट बस हड़ताल प्रतापगढ़ की स्थिति बनी, क्योंकि इससे यात्रियों और बस संचालकों—दोनों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
टेंपरेरी परमिट बना बड़ा मुद्दा
इसके अलावा टेंपरेरी परमिट नहीं मिलने से बस संचालकों में भारी नाराजगी है। संचालकों का कहना है कि अस्थायी परमिट प्रक्रिया जटिल है, जिससे समय पर बसें नहीं चल पातीं। यही कारण है कि प्राइवेट बस हड़ताल प्रतापगढ़ को मजबूरी में अपनाना पड़ा।
एमपी-राजस्थान बस किराया समान करने की मांग
एक अन्य प्रमुख मांग यह भी है कि मध्य प्रदेश और राजस्थान में एक जैसी बसों के लिए किराया दर समान होनी चाहिए। वर्तमान में अलग-अलग दरें होने से बस संचालकों को आर्थिक नुकसान हो रहा है। इस असमानता को समाप्त करने की मांग भी प्राइवेट बस हड़ताल प्रतापगढ़ के केंद्र में है।
महिलाओं को छूट की मांग
बस संचालकों की मांग है कि रोडवेज बसों की तरह प्राइवेट बसों में भी महिलाओं को किराए में छूट दी जाए। इससे न केवल महिलाओं को राहत मिलेगी बल्कि निजी बसों की सवारी भी बढ़ेगी। यह मांग भी 11 सूत्रीय मांगों में शामिल है।
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यात्रियों पर क्या पड़ेगा असर?
प्राइवेट बस हड़ताल प्रतापगढ़ के चलते ग्रामीण क्षेत्रों से जिला मुख्यालय, अस्पताल, कोर्ट और बाजार आने-जाने वाले यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। वैकल्पिक साधनों की संख्या सीमित होने के कारण यात्री खासे परेशान नजर आ सकते हैं।
प्रशासन की नजर
हड़ताल को लेकर प्रशासन भी सतर्क है। सुरक्षा व्यवस्था और यातायात नियंत्रण के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं। हालांकि अब तक हड़ताल को लेकर कोई समझौता नहीं हुआ है।
कुल मिलाकर प्राइवेट बस हड़ताल प्रतापगढ़ केवल बस संचालकों का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह आम जनता से जुड़ा बड़ा विषय बन चुका है। अब देखना होगा कि प्रशासन और परिवहन विभाग इस पर क्या रुख अपनाते हैं।
