प्रतापगढ़ रामधुन वायरल वीडियो: यूपी नहीं, राजस्थान का है सच्चा वीडियो, जानिए वायरल दावे की हकीकत
प्रतापगढ़ रामधुन वायरल वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर देशभर में तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में एक चौराहे पर लगे ऊँचे टॉवर से सुबह-शाम रामधुन और हनुमान चालीसा का प्रसारण होता दिखाई देता है। पहली नज़र में यह दृश्य धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक वातावरण को दर्शाता है, लेकिन सोशल मीडिया पर इसके साथ जो दावा जोड़ा जा रहा है, वह भ्रमित करने वाला है।
वायरल दावा क्या कहता है?
सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे कई पोस्ट्स में दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ का है। पोस्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि:
पहले स्थानीय लोगों ने मस्जिद में अज़ान की आवाज़ कम करने का अनुरोध किया
कथित तौर पर सहमति नहीं बनी
इसके बाद चौराहे पर 50 फीट ऊँचे खंभे पर 13 लाउडस्पीकर लगाकर हनुमान चालीसा तेज़ आवाज़ में चलाने का निर्णय लिया गया
इन दावों को “लाउडस्पीकर शोर से निपटने का मॉडल” बताकर प्रचारित किया जा रहा है।

फैक्ट-चेक: यह वीडियो असल में कहाँ का है?
प्रतापगढ़ रामधुन वायरल वीडियो की पड़ताल करने पर साफ होता है कि यह वीडियो उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ का नहीं, बल्कि राजस्थान के प्रतापगढ़ जिला मुख्यालय का है।
यह प्रसारण:
गांधी चौराहा, प्रतापगढ़ (राजस्थान) से जुड़ा है
नगर परिषद प्रतापगढ़ की आधिकारिक पहल है
इसे धार्मिक टकराव से जोड़ना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है
नगर परिषद की पहल क्या है?
स्थानीय जानकारी के अनुसार, यह व्यवस्था प्रतापगढ़ नगर परिषद द्वारा की गई है। नगर परिषद की सभापति रामकन्या गुर्जर के नेतृत्व में यह पहल शहर में:
सुबह और शाम शांतिपूर्ण वातावरण
सकारात्मक ऊर्जा
सांस्कृतिक परंपरा के संरक्षण
के उद्देश्य से शुरू की गई थी।
👉 इस पहल का उद्देश्य धार्मिक प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि भक्ति और मानसिक शांति का माहौल बनाना बताया गया है।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
शहर के कई नागरिकों का कहना है कि:
सुबह रामधुन से दिन की शुरुआत सकारात्मक होती है
शाम को भजन से मानसिक शांति मिलती है
यह किसी समुदाय के खिलाफ नहीं है
हालांकि, कुछ सोशल मीडिया पोस्ट्स में इसे जानबूझकर विवादास्पद रंग देने की कोशिश की गई।

सोशल मीडिया पर भ्रम क्यों फैलता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि:
समान नाम वाले जिलों (UP और Rajasthan दोनों में प्रतापगढ़) के कारण भ्रम
अधूरी जानकारी के साथ भावनात्मक कैप्शन
वीडियो को संदर्भ से काटकर पेश करना
ऐसे मामलों में फेक नैरेटिव को जन्म देता है।
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प्रशासनिक दृष्टिकोण
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार:
ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियम सभी पर समान रूप से लागू हैं
किसी भी धार्मिक गतिविधि को नियमों के भीतर ही अनुमति दी जाती है
वायरल दावे प्रशासनिक पुष्टि पर आधारित नहीं हैं
निष्कर्ष
प्रतापगढ़ रामधुन वायरल वीडियो को उत्तर प्रदेश से जोड़कर फैलाया जा रहा दावा भ्रामक है। वास्तविकता यह है कि यह वीडियो राजस्थान के प्रतापगढ़ की नगर परिषद पहल से जुड़ा है। धार्मिक आस्था और सामाजिक सौहार्द जैसे विषयों पर किसी भी वीडियो को शेयर करने से पहले तथ्यों की जांच बेहद ज़रूरी है।
